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Nadi Dosh || Know the truth and end your problem || nadi dosha in marriage solution || marriage solution nadi dosha

Nadi Dosh || Know the truth and end your problem || nadi dosha in marriage solution || marriage solution nadi dosha

Here’s a clear and detailed **description of Nadi Dosha in marriage and its solutions** in English:

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## **Nadi Dosha in Marriage – Meaning, Effects, and Remedies**

In Vedic astrology, **Nadi Dosha** is considered one of the most significant factors during *Kundli Milan* (horoscope matching) for marriage. It is one of the **Ashta Koota** parameters, which checks compatibility between the bride and groom. Out of 36 gunas, **Nadi Koota** carries the highest weightage of **8 points**.

If the Nadi points do not match, the pair is said to have **Nadi Dosha**, which, according to astrological principles, may lead to:

* Health problems in children
* Weak marital bond or misunderstandings
* Infertility or complications in childbirth
* Poor family harmony and emotional distance

### **Types of Nadi**

There are three Nadis in astrology:

1. **Adi Nadi** – Represents *Vata* (air) element
2. **Madhya Nadi** – Represents *Pitta* (fire) element
3. **Antya Nadi** – Represents *Kapha* (water) element

**Rule:** If both partners have the same Nadi, it is considered **Nadi Dosha**.

## **Causes of Nadi Dosha**

* Same Nadi in both horoscopes during Kundli matching
* Incomplete or incorrect birth details during matching
* Certain planetary positions worsening the Dosha effect

## **Effects of Nadi Dosha**

* Health issues in progeny
* Marital dissatisfaction or detachment
* Emotional conflicts and lack of understanding
* Problems in conceiving or miscarriage risks

## **Solutions for Nadi Dosha**

Vedic astrology offers several remedies to neutralize the malefic effects of Nadi Dosha:

### **1. Nadi Dosha Cancellation (Nadi Dosha Bhanga)**

The dosha may get automatically cancelled in certain cases:

* If the *Nakshatras* of both partners are different, even with the same Nadi.
* If the Rashi Lords of both are the same or friendly.
* If the birth charts show strong health and progeny-supporting yogas.

### **2. Vedic Remedies**

* **Nadi Dosha Nivaran Puja** – Special rituals performed by learned priests to pacify malefic effects.
* **Maha Mrityunjaya Mantra Japa** – Chanting 1,25,000 times followed by Havan to promote good health and longevity.
* **Donation and Charity** – Donating food, clothes, and other essentials to the needy, especially on auspicious days.
* **Feeding Brahmins & Cows** – Offering food to Brahmins and feeding green fodder to cows is considered highly effective.

### **3. Practical Solutions**

* Marrying a person with the same Nadi but strong *Graha Bal* in the charts can reduce effects.
* Strengthening the 5th house (children) and 7th house (marriage) through gemstones and mantras.
* Adopting lifestyle changes to promote harmony, communication, and health.

✅ **Conclusion:**
Nadi Dosha is not an unbreakable obstacle to marriage. With proper horoscope analysis, remedies, and spiritual practices, its negative impact can be reduced or nullified. Consulting an experienced astrologer ensures that solutions are customized to the couple’s birth charts.

If you want, I can also prepare this in a **promotional style for your “Pooja Jyotish Karyalay”** so it sounds like a professional service description. That way, it can be directly used for your website or social media. Would you like me to make that version?

 

 

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कुंडली दोष: पहचान, प्रभाव और समाधान

परिचय

कुंडली दोष का महत्व ज्योतिष शास्त्र में अत्यधिक होता है। जब कोई ग्रह अशुभ स्थिति में होता है या कुंडली में गलत स्थान पर स्थित होता है, तो यह व्यक्ति के जीवन में विभिन्न समस्याएँ पैदा कर सकता है। विवाह में देरी, आर्थिक परेशानियाँ, स्वास्थ्य समस्याएँ और पारिवारिक कलह कुंडली दोष के कुछ सामान्य प्रभाव हो सकते हैं। इस लेख में हम कुंडली दोष की पहचान, इसके प्रभाव और इसके निवारण के उपायों पर चर्चा करेंगे।

कुंडली दोष क्या होता है?

कुंडली दोष तब उत्पन्न होता है जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति सही नहीं होती। कुछ ग्रह जब अशुभ भावों में स्थित होते हैं या आपस में शत्रुतापूर्ण संबंध बनाते हैं, तो वे नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। कुंडली दोष मुख्य रूप से ग्रहों की दशा, अंतरदशा, और योगों के आधार पर देखे जाते हैं।

 

 

 

प्रमुख कुंडली दोष और उनके प्रभाव

1. मांगलिक दोष

मंगल ग्रह जब पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है, तो इसे मांगलिक दोष कहा जाता है। इसके प्रभाव इस प्रकार हो सकते हैं:

  • विवाह में देरी
  • दांपत्य जीवन में तनाव
  • जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव
  • वैवाहिक जीवन में अस्थिरता

2. कालसर्प दोष

जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं, तो इसे कालसर्प दोष कहा जाता है। इसके प्रभाव निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • मानसिक तनाव और अवसाद
  • करियर में बाधाएँ
  • आर्थिक परेशानियाँ
  • स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ

3. पितृ दोष

पितृ दोष तब उत्पन्न होता है जब पूर्वजों की आत्मा अशांत होती है या उनकी मृत्यु के बाद विधिवत श्राद्ध कर्म नहीं किए जाते। इसके प्रभाव:

  • परिवार में कलह
  • संतान प्राप्ति में बाधा
  • आर्थिक संकट
  • स्वास्थ्य समस्याएँ

4. ग्रहण दोष

जब जन्म कुंडली में सूर्य या चंद्रमा राहु या केतु के साथ होते हैं, तो इसे ग्रहण दोष कहा जाता है। इसके प्रभाव:

  • आत्मविश्वास की कमी
  • मानसिक तनाव
  • करियर में अस्थिरता

5. शनि दोष (साढ़े साती और ढैय्या)

जब शनि ग्रह चंद्रमा से बारहवें, पहले या दूसरे भाव में स्थित होता है, तो इसे शनि साढ़े साती कहते हैं। इसके प्रभाव:

  • करियर में रुकावटें
  • मानसिक तनाव और अवसाद
  • आर्थिक परेशानियाँ

कुंडली दोष निवारण के उपाय

कुंडली दोषों को सही करने के लिए ज्योतिषीय उपाय अपनाए जाते हैं। कुछ प्रमुख उपाय इस प्रकार हैं:

1. मंत्र जाप और पूजा-पाठ

  • मांगलिक दोष के लिए हनुमान चालीसा और मंगल ग्रह के मंत्रों का जाप करें।
  • कालसर्प दोष के लिए महामृत्युंजय मंत्र और राहु-केतु के मंत्रों का जाप करें।
  • पितृ दोष के निवारण के लिए पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म करें।
  • ग्रहण दोष से बचने के लिए सूर्य और चंद्र मंत्र का जाप करें।
  • शनि दोष के निवारण के लिए शनि चालीसा का पाठ करें और शनि मंदिर में तेल अर्पित करें।

2. रत्न धारण करना

  • मांगलिक दोष के लिए मूंगा (कोरल) रत्न धारण करें।
  • कालसर्प दोष के लिए गोमेद और लहसुनिया पहनें।
  • पितृ दोष से बचने के लिए पीला पुखराज या मोती धारण करें।
  • ग्रहण दोष के लिए पुखराज (टॉपाज) या मोती पहनें।
  • शनि दोष से बचने के लिए नीलम (ब्लू सफायर) धारण करें।

3. दान और उपाय

  • मांगलिक दोष में मंगलवार को मसूर दाल, गुड़ और लाल कपड़ा दान करें।
  • कालसर्प दोष में नाग-नागिन की पूजा करें और काले तिल दान करें।
  • पितृ दोष में श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोजन कराएँ और पितरों के निमित्त दीप जलाएँ।
  • ग्रहण दोष में छाया दान करें और गरीबों को सफेद वस्त्र दान करें।
  • शनि दोष में शनिवार को तेल, काले चने और लोहे की वस्तुएँ दान करें।

निष्कर्ष

कुंडली दोषों का प्रभाव जीवन के विभिन्न पहलुओं पर पड़ सकता है, लेकिन सही ज्योतिषीय उपायों से इनका निवारण संभव है। यदि आप भी अपने जीवन में किसी प्रकार की बाधाओं का सामना कर रहे हैं, तो एक अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लें और सही समाधान अपनाएँ। उचित पूजा-पाठ, दान और मंत्र जाप से कुंडली दोषों के प्रभाव को कम किया जा सकता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

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